tag:blogger.com,1999:blog-9026435.post-1099687604607204612004-08-10T15:45:00.000-04:002004-11-05T16:31:24.406-05:00अच्छा ये मोहब्बत का असर देख रहा हूँAnother one from Hussain bandhu. अच्छा ये मोहब्बत का असर देख रहा हूँ तुम ही नज़र आते हो जिधर देख रहा हूँ काबे की ज़रूरत है न बुतख़ाने की ख़्वाहिश जिस सिम्त दिखाते हो उधर देख रहा हूँ ये है कशिश-ए-हुस्न कि है हसरत-ए-दीदार ताक़त नहीं बाक़ी है मगर देख रहा हूँ कम-कम सा हुआ जाता है तारों का झलकना आने को है पैग़ाम-ए-सहर देख रहा हूँ In ISB format: % ITRANS Song # % \startsong \stitle{v9ynoreply@blogger.com