tag:blogger.com,1999:blog-9026435.post109968911058363515..comments2007-02-20T10:00:06.879-05:00Comments on अंदाज़-ए-बयाँ और: ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल v9ynoreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-9026435.post-1131909028292431802005-11-13T14:10:00.000-05:002005-11-13T14:10:00.000-05:00रजनीश:उस गाने की पहली पंक्ति यूँ है - ज़ेहाल-ए-मिस्...रजनीश:उस गाने की पहली पंक्ति यूँ है - ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन बरंजिशबहाल-ए-हिज़्राँ बेचारा दिल हैअर्थ कुछ-कुछ यूँ है (किसी ने बताया था, मुझे फ़ारसी नहीं आती) - इस ग़रीब-हाल (मुझ) पर नाराज़ न हो, क्योंकि ये बेचारा दिल वियोग में दुखी है।Vinayhttp://www.blogger.com/profile/07973018577021600722noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-9026435.post-1129497115885923632005-10-16T17:11:00.000-04:002005-10-16T17:11:00.000-04:00कुछ ऐसे ही लफ़्ज़ों से शुरू होता हुआ एक गाना फ़िल्म '...कुछ ऐसे ही लफ़्ज़ों से शुरू होता हुआ एक गाना फ़िल्म 'ग़ुलामी' में है जो मिथुन चक्रबर्ती और अनीता राज़ पर फ़िल्माया गया है। अगर उन शुरूआती पंक्तियों का मतलब समझा दें तो बहुत मेहरबानी होगी।रजनीश मंगलाhttp://www.blogger.com/profile/08365898829052109147noreply@blogger.com